जयपुर। राजस्थान के जयपुर जिले की मौजमाबाद तहसील में स्थित ऐतिहासिक भैराणा धाम (दादू पालका धाम) को बचाने के लिए चल रहा आंदोलन अब पूरी तरह गर्मा गया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के राष्ट्रीय संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मुद्दे पर भजनलाल सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बड़ा ऐलान कर दिया है। भैराणा धाम की भूमि को रीको औद्योगिक क्षेत्र के लिए आवंटित किए जाने के विरोध में साधु-संत पिछले कई दिनों से चिलचिलाती धूप में आंदोलन और अग्नितप कर रहे हैं। अब इस आंदोलन को जन आंदोलन बनाने के लिए 27 मई को भैराणा धाम में एक ऐतिहासिक महापंचायत व महापड़ाव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर से लाखों लोगों के जुटने का दावा किया गया है।
रीको को जमीन देने का कड़ा विरोध: बेनीवाल के तल्ख तेवर
मीडिया से बातचीत करते हुए नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रदेश सरकार पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो पार्टी खुद को साधु-संतों और सनातन संस्कृति का हितैषी बताती है, आज उसी के राज में संतों की आस्था पर चोट की जा रही है।” बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि भैराणा धाम दादू पंथ संप्रदाय का सबसे पवित्र और ऐतिहासिक केंद्र है, जहां का प्राकृतिक सौंदर्य, हजारों खेजड़ी के पेड़, गौचर भूमि और वन्यजीव क्षेत्र की धरोहर हैं। सरकार ने इस पावन भूमि को रीको औद्योगिक क्षेत्र के हवाले कर संतों और जनता की भावनाओं को कुचला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
27 मई की महापंचायत: जुटेगा 5 लाख लोगों का हुजूम
सांसद बेनीवाल ने दावा किया है कि 27 मई को आयोजित होने वाले महापड़ाव में जयपुर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, अजमेर, टोंक सहित पूरे राजस्थान से तकरीबन 5 लाख लोग और साधु-संत हिस्सा लेंगे। उन्होंने प्रशासनिक और सरकारी तंत्र को चेतावनी देते हुए कहा, “इस बार लड़ाई आर-पार की होगी। हम वहां सिर्फ प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि अपनी मांगें मनवा कर ही दम लेंगे। सरकार को कुछ ही घंटों में अपनी गलती का अहसास हो जाएगा। संतों का यह अपमान अब सड़कों पर न्याय की जंग में तब्दील हो चुका है।”
पर्यावरण और जन-अधिकारों की रक्षा का संकल्प
भैराणा धाम के आंदोलनकारी संतों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के नाम पर यहां की प्राकृतिक वनस्पतियों और जंगलों को काटा जा रहा है। यह लड़ाई केवल एक धार्मिक स्थल को बचाने की नहीं है, बल्कि:
- गौमाता और गौचर भूमि के संरक्षण की लड़ाई है।
- खेजड़ी व पर्यावरण की रक्षा का महासंकल्प है।
- स्थानीय जनता के अधिकारों और उनकी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने का आंदोलन है।
प्रशासनिक अमले में मची खलबली
हनुमान बेनीवाल के इस आक्रामक रुख और ‘न्याय योद्धा’ वाली छवि के चलते महापंचायत से पहले ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। खुफिया एजेंसियां पल-पल की रिपोर्ट ले रही हैं, क्योंकि बेनीवाल ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने समय रहते रीको को हटाने का फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन उग्र रूप अख्तियार कर सकता है और इसकी पूरी जिम्मेदारी भजनलाल सरकार की होगी।


