मुर्शिदाबाद/मालदा: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए प्रचार अभियान अब अपने चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज उत्तर और मध्य बंगाल के चुनावी रण में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मुर्शिदाबाद की सड़कों पर उमड़े जनसैलाब के बीच ममता बनर्जी ने न केवल अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों पर तीखे हमले बोलकर राज्य के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
मुर्शिदाबाद में मेगा रोड शो: ‘बांग्ला भाषा और संस्कृति’ पर दांव
मुर्शिदाबाद के ऐतिहासिक गलियारों में आज दोपहर ममता बनर्जी का विशाल रोड शो निकला। फूलों से सजे खुले ट्रक पर सवार ममता बनर्जी ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। इस दौरान समर्थकों की भारी भीड़ ‘खेला होबे’ और ‘दीदी’ के नारों से आसमान गुंजा रही थी।
रोड शो के समापन पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने ‘बंगाली अस्मिता’ का कार्ड खेला। उन्होंने जनता को चेतावनी देते हुए कहा, “सावधान रहें! अगर भाजपा बंगाल की सत्ता में आई, तो वे हमारी पहचान मिटा देंगे। उनकी नीति एक देश, एक भाषा की है, जिससे ‘बांग्ला भाषा’ का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा बाहरी लोगों की पार्टी है जो बंगाल की संस्कृति और परंपराओं को नहीं समझती।

मालदा में कांग्रेस पर हमला: SIR मुद्दे पर तकरार
मुर्शिदाबाद से पहले ममता बनर्जी ने मालदा में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। यहाँ उनके निशाने पर केंद्र की भाजपा सरकार के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन के साथी रही कांग्रेस भी थी। ममता ने विशेष रूप से एसआईआर (SIR – Strategic Investment Region) मुद्दे का जिक्र करते हुए कांग्रेस को घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब बंगाल के विकास और किसानों के हितों के लिए ‘एसआईआर’ के मुद्दे पर केंद्र से लड़ने की बात आई, तो कांग्रेस ने टीएमसी का साथ नहीं दिया। ममता ने कहा, “कांग्रेस केवल वोटों की राजनीति करती है। जब दिल्ली में बंगाल के हक की बात आती है, तो वे चुप्पी साध लेते हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद के लोगों को यह समझना होगा कि कांग्रेस को वोट देने का मतलब भाजपा को फायदा पहुँचाना है।”
ध्रुवीकरण और स्थानीय समीकरण
मुर्शिदाबाद और मालदा पारंपरिक रूप से कांग्रेस के गढ़ रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में टीएमसी ने यहाँ अपनी पैठ मजबूत की है। ममता बनर्जी का इन क्षेत्रों में इतना आक्रामक होना यह दर्शाता है कि वे अल्पसंख्यक बहुल इन जिलों में किसी भी कीमत पर अपना आधार खिसकने नहीं देना चाहतीं। उन्होंने एनआरसी (NRC) और सीएए (CAA) के मुद्दे को भी हवा दी, जिससे मतदाताओं के बीच एक स्पष्ट संदेश जाए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
ममता बनर्जी के इन बयानों के बाद भाजपा ने भी पलटवार किया है। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि ममता हार के डर से भाषा और धर्म के नाम पर लोगों को डरा रही हैं। वहीं, कांग्रेस ने ‘एसआईआर’ मुद्दे पर आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि टीएमसी खुद विपक्ष को कमजोर कर रही है।
आज के इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि 2026 का बंगाल चुनाव केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि ‘अस्मिता’ और ‘पहचान’ की लड़ाई बन चुका है। ममता बनर्जी ने खुद को ‘बंगाल की बेटी’ के रूप में पेश कर भाजपा के हिंदुत्व कार्ड के सामने ‘बांग्ला राष्ट्रवाद’ की एक मजबूत दीवार खड़ी करने की कोशिश की है।


