जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 30 साल पुराने अभेद्य किले को ढहा दिया है। सोमवार, 3 अगस्त 2026 को आए चुनावी नतीजों में प्रशांत किशोर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी, भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया। चुनाव आयोग द्वारा घोषित अंतिम आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत किशोर को कुल 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को महज 44,827 वोटों से संतोष करना पड़ा। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,273 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। यह जीत प्रशांत किशोर के राजनीतिक जीवन की पहली चुनावी सफलता है और इसके साथ ही बिहार विधानसभा में जन सुराज पार्टी का खाता भी खुल गया है।
बांकीपुर: भाजपा का तीन दशकों का साम्राज्य ध्वस्त
पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र (पूर्व में पटना पश्चिम) वर्ष 1995 से ही भाजपा का सबसे मजबूत और सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर पिछले पांच चुनावों से भाजपा के कद्दावर नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद नितिन नवीन का एकछत्र राज था, जिन्होंने नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD को 52,000 से अधिक वोटों से हराया था। अप्रैल 2026 में नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर 30 जुलाई 2026 को उपचुनाव कराए गए थे। इस उपचुनाव में कुल 26 उम्मीदवार मैदान में थे और महज 34.30% मतदान दर्ज किया गया था। कम वोटिंग टर्नआउट के बावजूद प्रशांत किशोर ने हर राउंड की मतगणना में अपनी बढ़त बनाए रखी और 32 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद इतिहास रच दिया।
चुनावी नतीजों का मुख्य विश्लेषण
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त मत | मतों का अंतर / स्थान |
|---|---|---|---|
| प्रशांत किशोर | जन सुराज पार्टी (JSP) | 64,151 | विजेता (+19,324) |
| नीरज कुमार सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 44,827 | दूसरे स्थान पर |
| रेखा कुमारी | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) | 14,273 | तीसरे स्थान पर |
हार-जीत के पीछे के प्रमुख कारण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस उपचुनाव में मतदाताओं ने पारंपरिक जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर मतदान किया है। जहाँ भाजपा ने ऐन वक्त पर एक लो-प्रोफाइल युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिया, वहीं प्रशांत किशोर ने खुद जमीन पर उतरकर स्थानीय मुद्दों, शिक्षा, रोजगार और पलायन को मुख्य चुनावी एजेंडा बनाया। इसके अलावा, हाल के महीनों में छात्रों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों, पेपर लीक के मामलों और स्थानीय स्तर पर अगड़ी जातियों में राज्य सरकार के कुछ फैसलों के खिलाफ उपजा असंतोष भी भाजपा के इस गढ़ के टूटने की बड़ी वजह बना।
बिहार जाति-धर्म की राजनीति से आगे बढ़कर विकास और शिक्षा को चुन रहा है – PK
ऐतिहासिक जीत के बाद पटना के ए.एन. कॉलेज मतगणना केंद्र और जन सुराज मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी। प्रशांत किशोर ने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत बांकीपुर के प्रबुद्ध नागरिकों का संदेश है कि अब बिहार जाति-धर्म की राजनीति से आगे बढ़कर विकास और शिक्षा को चुन रहा है। वहीं, बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी इस जनादेश का सम्मान करती है और हार के कारणों की गंभीरता से समीक्षा व आत्ममंथन करेगी। बांकीपुर का यह परिणाम आगामी बिहार की राजनीति में एक नए क्षेत्रीय विकल्प के उभार का स्पष्ट संकेत दे रहा है।


