जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित चल रहे पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों को लेकर आज राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य की भजनलाल सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि प्रदेश में 31 जुलाई 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया को हर हाल में संपन्न कराया जाए। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
सरकार ने मांगा था दिसंबर तक का समय, कोर्ट ने खारिज किया
राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर चुनाव टालने के लिए दำसंबर 2026 तक का समय मांगा था। सरकार ने इसके पीछे कई कारण गिनाए थे:-
- शिक्षकों की व्यस्तता: अप्रैल और मई में स्कूलों के नए सत्र और एडमिशन कार्यों में शिक्षकों की व्यस्तता।
- भीषण गर्मी: मई-जून के महीनों में राज्य में पड़ने वाली अत्यधिक भीषण गर्मी और लू (Heatwave)।
- मानसून और खेती: जुलाई से सितंबर तक बारिश का मौसम होने के कारण ग्रामीणों का खेती के कार्यों में व्यस्त रहना।
हालांकि, माननीय हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार के इन सभी तर्कों को दरकिनार करते हुए साफ कहा कि चुनाव कराने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में इस तरह की देरी स्वीकार्य नहीं है।
OBC आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
इस पूरे मामले में राज्य सरकार का एक मुख्य तर्क यह भी था कि जब तक ओबीसी आरक्षण का निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक चुनाव कराना संभव नहीं है क्योंकि इससे पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा। इस पर हाईकोर्ट ने रास्ता निकालते हुए ओबीसी कमीशन (OBC Commission) को निर्देशित किया है कि वह 20 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से सबमिट करे। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को 20 जून से 31 जुलाई के बीच चुनाव की पूरी प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी।
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर आया फैसला
आपको बता दें कि इससे पहले 14 नवंबर को हाईकोर्ट ने सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने की डेडलाइन दी थी। जब तय समय सीमा में चुनाव नहीं कराए गए, तो पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कोर्ट के आदेशों की पालना न होने पर अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आज यह अंतिम और कड़ा फैसला सुनाया है।
कांग्रेस उत्साहित, बीजेपी सरकार के सामने बड़ी चुनौती
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जहां मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस बेहद उत्साहित नजर आ रही है और लगातार सरकार पर जानबूझकर चुनाव टालने के आरोप लगा रही है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के सामने अब तय समय में ओबीसी रिपोर्ट तैयार करवाकर मानसून के मौसम में मतदान कराने की बहुत बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। अब सभी की नजरें राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) की आगामी तैयारियों और अधिसूचना पर टिकी हुई हैं।


