जयपुर। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आज राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा से मुलाकात करके पुलिस तंत्र के दुरुपयोग, पार्षद चोरी और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ हुए खिलवाड़ को लेकर ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस नेताओं के निकाय चुनाव में भाजपा सरकार द्वारा पुलिस तंत्र के कथित दुरुपयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के गंभीर आरोपों के साथ दोनों कांग्रेसी नेताओं ने डीजीपी से विस्तार में चर्चा की। उन्होंने डीजीपी से निष्पक्ष जांच करवाने और उचित कार्रवाई करने की मांग भी की।
डीजीपी राजीव शर्मा से मुलाकात के बाद पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि, ‘पुलिस का सहयोग लेकर सरकार ने जो गुंडागर्दी की, पार्षदों को धमकाने का काम किया, झूठी एफआई की और डरा धमका कर मत प्रतिशत में बराबर होने के बावदूज बेईमानी से ज्यादा चेयरमेन बनाए, जिसमें पुलिस का जो सहयोग रहा इसको लेकर हमने डीजीपी को ज्ञापन दिया। साथ ही जिन पुलिस अधीक्षकों ने बेईमानी में साथ नहीं दिया, उनका तबादला सूची में नाम डाल दिया गया। एसपी, डीएसपी, सीआई तक जिन्होंने सरकार का साथ नहीं दिया, उनकी बलि ले ली गई। मेरा मानना है कि सीएमओ में बैठे अधिकारी मॉनीटरिंग कर रहे थे और एक भी जगह ऐसी नहीं थी, जहां कांग्रेस के जीते हुए पार्षद जहां रुके थे वहां पुलिस न गई हो।’
इस मामले में प्रेस से मुखातिब होते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि, ‘जब पूरा प्रदेश देख रहा था कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाने का है उसमें पुलिस पार्षद पकड़ने का काम कर रही थी। मैंने और अध्यक्षजी ने सबूतों के साथ शिकायत दी है और डीजीपी साब से निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो जाए। राजस्थान में कोई भी सरकार रही हो, लेकिन पुलिस द्वारा पार्षद पकड़ने का काम पहली बार हुआ है। मैं समझता हंू पुलिस की काफी किरकिरी हुई और भाजपा तानाशाही और गुुंडागर्दी के दम पर कह रही है कि हमने चेयरमेन बना लिए। सरकार जो तानाशाही कर रही है यह जनता के सामने आ चुकी है।’
मीडिया से मुलाकात में दोनों नेताओं ने निकाय चुनावों की हुई धांधली के आरोप लगाते हुए पंचायती राज चुनावों में जनता के जवाब देने की बात कही।


