मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आज गांधी जयंती के अवसर पर भारी सियासी गहमागहमी देखने को मिल रही है। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू हो चुका है।
मुंबई पुलिस द्वारा इस विरोध प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने के बावजूद, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 पर जुटने शुरू हो गए हैं। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पूरे दादर और शिवाजी पार्क इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
क्यों हो रहा है CJP का यह प्रदर्शन?
यह पूरा विवाद मतदाता सूची में किए गए संशोधनों से जुड़ा है। हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर ही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लिए गए फैसलों को लेकर मतभेद सामने आए थे। CJP का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें –
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
- स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत तैयार की गई संशोधित सूची को तुरंत फ्रीज (रोका) किया जाए।
- साल 2025 की मूल मतदाता सूची को बहाल किया जाए और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें वापस जोड़ा जाए।
- भविष्य में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और उसमें नागरिक समाज (Civil Society) की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
पुलिस की पाबंदी और स्थानीय लोगों का विरोध
मुंबई पुलिस ने कानून-व्यवस्था और बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के आदेश (जिसके तहत शिवाजी पार्क को ‘साइलेंस जोन’ घोषित किया गया है) का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। पुलिस ने आयोजकों को किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर जाने की सलाह दी थी. हालांकि, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि “बापू ने भी अंग्रेजों से आंदोलन की अनुमति नहीं मांगी थी,” और वे तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ रहे हैं।
इस आंदोलन को लेकर केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि शिवाजी पार्क के स्थानीय निवासी भी काफी नाराज हैं। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही स्थानीय लोगों और CJP के समन्वयकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवासीय इलाके में इस तरह के बड़े राजनीतिक आंदोलनों से उनकी शांति और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है, जिसके चलते उन्होंने प्रदर्शनकारियों का विरोध किया।
राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी
मुंबई का यह प्रदर्शन CJP के देशव्यापी आंदोलन का पहला चरण है. संगठन के मुताबिक, मुंबई के बाद यह विरोध प्रदर्शन देश के छह अन्य प्रमुख शहरों (जैसे गोवा और कोलकाता) में आयोजित किया जाएगा। यह पूरा आंदोलन अक्टूबर के अंत में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़े धरने के साथ समाप्त होगा। दिपके का साफ कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, यह आंदोलन जारी रहेगा।
वर्तमान में, मौके पर 3,000 से 4,000 लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। शबाना आजमी और विशाल ददलानी जैसी मशहूर हस्तियों के भी इस प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।


