जयपुर की लाइफलाइन माने जाने वाली द्रव्यवती नदी अपने अस्तित्व से हर रोज जूझ रही है। आमेर-नाहरगढ़ की पहाड़ियों ने निकलकर करीब 47.5 किलोमीटर तक पहुंचने के बाद ढूंढ नदी में मिलने वाली यह नदी कचरे, सीवरेज, फैक्ट्रियों से निकलेकेमिकल्स और दूसरे वेस्ट से हर रोज मर रही है। विधायक डॉट कॉम की टीम ने ग्राउंड पर जाकर द्रव्यवती नदी के उदगम से अंत तक को कवर किया।
जयपुर शहर के अलग-अलग इलाकों से गुजरते हुए द्रव्यवती नदी में उस इलाके का कचरा, गंदा पानी, सीवरेज मिक्स पानी, केमिकल्स मिलते गए। शहर के शास्त्री नगर, मानसरोवर, महारानी फार्म, प्रताप नगर, सीतापुरा, रामपुरा बांध, गोनेर समेत ढूंढ नदी के संगम तक हमारी टीम ने पहुंच कर उस हर पहलू को जानने-समझने और कवर करने की कोशिश की, जिनपर ध्यान देकर प्रशासन, जयपुर विकास प्राधिकरण और यूडीएच मंत्री बहुत कुछ कर सकते हैं।
भाजपा सरकार ने करीब 8 साल पहले 1676 करोड़ रुपए खर्च कर इस नदी को जीवनदान दिया था। लेकिन दिन गुजरते गए, साल गुजरते गए और द्रव्यवती नदी फिर एक बार नाला बन गई है। शहर के बीचों-बीच वेनिस जैसी फीलिंग देने के सपने दिखा कर प्रशासन ने, नेता और मंत्रियों ने जिस नदी को आबाद करने की बात कही आज उनके सामने ही इसकी दुर्दशा हो रही है।


