By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Vidhayak.comVidhayak.comVidhayak.com
  • Home
  • News & Views
  • Political Kundali
  • Youth Leadership
  • Vidhayak Exclusive
  • Corridors of Power
  • Beyond Politics
  • Contact Us
    • About Us
    • Editor in Chief
    • Legal
    • Advertisement
    • Privacy Policy
Notification Show More
Font ResizerAa
Vidhayak.comVidhayak.com
Font ResizerAa
  • Rajneeti
  • News & Views
  • Vidhayak Exclusive
  • Political Kundali
  • Beyond Politics
  • Youth Leadership
  • Home
  • News & Views
  • Political Kundali
  • Youth Leadership
  • Vidhayak Exclusive
  • Corridors of Power
  • Beyond Politics
  • Contact Us
    • About Us
    • Editor in Chief
    • Legal
    • Advertisement
    • Privacy Policy
Follow US
Vidhayak.com > Youth Leadership > ऋतु बराला की नहीं हुई FIR दर्ज
Youth Leadership

ऋतु बराला की नहीं हुई FIR दर्ज

News Desk Vidhayak.com
Last updated: 2026/10/20 at 10:33 AM
By News Desk Vidhayak.com
Share
8 Min Read
SHARE

जयपुर। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के चलते विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा हाथापाई के वीडियो वायरल होने के बाद अब जयपुर में हंगामा मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर ऋतु के साथ मारपीट के वीडियो फिर राहुल गांधी की इस मसले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मामला गर्मा गया है।

राजस्थान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को एफआईआर दर्ज करवाने के लिए राहुल गांधी के निर्देशों के बाद सोमवार से गोविंद सिंह डोटासरा सहित कांग्रेस के विधायक, नेता, एनएसयूआई के नेता और कार्यकर्ताओं ने जयपुर पुलिस कमिशनर के कार्यालय में धरना दे दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पहले डोटासरा और उनकी टीम मोती डूंगरी थाने में सोमवार को एफआरआई दर्ज करवाने गई थी, लेकिन वहां से टालमटोली के बाद डोटासरा अड़ गए और पुलिस कमिशनर कार्यालय पर धरना दे दिया।

सोमवार रातभर पुलिस कमिशनर कार्यालय में धरने पर बैठे डोटासरा और उनकी टीम के वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इधर डोटासरा एफआईआर किए बिना उठने को तैयार नहीं हैं, उधर जयपुर पुलिस दिल्ली पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर लिखने को तैयार नहीं हुई है।

अब आगे क्या?

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा चूंकि खुद वकालत के पेशे से आते हैं और आक्रामक राजनीति करते हैं, ऐसे में डोटासरा किसी सांतवना या बातचीत से लौटने वाले नेता नहीं हैं। दूसरी ओर राहुल गांधी ने भी गोविंद सिंह डोटासरा को निर्देशित करते हुए एफआईआर दर्ज करवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था, उसके बाद से ही यह ताजा घटनाक्रम अपेक्षित था, लेकिन अब यह उलझता हुआ मामला जयपुर पुलिस पर आ पड़ा है।

उधर महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता का रखने की बात बारंबर मंचों पर कहने और स्टैंड लेने के लिए भाजपा के लिए भी यह दुविधापूर्ण स्थिति क्रिएट हो गई है कि ऋतु बराला मामले को मात्र रिपोर्ट दर्ज करके या टालमटोल करके सरकार कैसे निपटाएगी। इस उलझे मसले में गोविंद सिंह डोटासरा और आक्रामक रवैया अपनाते हुए राजस्थान पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। न्याय और अन्याय की लड़ाई के तौर पर मुद्दे को डोटासरा भुनाने से चूकने वाले नहीं हैं।

महिला अत्याचार एंगल से फंसा पेच

राजस्थान पुलिस ऋतु बराला मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करती, तो समस्या है सरकार का महिलाओं के प्रति कमजोर रुख और महिला सुरक्षा को लेकर असंवेदनशीलता के आरोप लगेंगे। इन आरोपों को भाजपा सरकार को लगातार फेस करना पडेÞगा। लेकिन मामला दर्ज हो जाता है तो सीजेपी और कांग्रेस के दिल्ली में हुए ऐसे प्रदर्शनों में पुलिस की लाठियों और बर्बरता को लेकर और मामले दर्ज करवाने का रास्ता भी खुल जाएगा।

एफआईआर तो दर्ज करनी पडेगी – डोटासरा

डोटासरा ने आरोप लगाया है कि, ‘हम पुलिस के आदेश से कमिशनर कार्यायल के कमरा नं. 9 में इतजार कर रहे हैं। क्योंकि हमें जीरो एफआईआर दर्ज करने की बात कहने पर यही रुकने के लिए कहा गया है।’ डोटासरा के अनुसार ‘हमें कहा गया है कि आप यहां बिराजिए, हम ऊपर बात करके बताएंगे। हम इंतजार कर रहे हैं कि ऊपर कहां बात करेंगे अमित शाह से करेंगे, भजनलाल से करेंगे या नरेन्द्र मोदी से करेंगे।’ डोटासरा ने कहा कि ‘यह डबल इंजन का अहंकार है कि जो भी आवाज उठाएगा उसको जेलों के अंदर करेगे। एफआईआर तो दर्ज करनी पडेगी, क्यों नहीं करेंगे, कानून है। कानून की पालना तो करनी पड़ेगी। कानून में जब प्रावधान है कि जीरो एफआईआर हो सकती है, तो इनको मानना पडेगा।’

क्या है Zero FIR ? क्या हैं Zero FIR दर्ज करने के नियम कानून ?

जीरो एफआईआर (Zero FIR) एक ऐसी प्रथम सूचना रिपोर्ट है जिसे देश के किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है, चाहे अपराध उस थाने के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में हुआ हो या नहीं। सामान्य एफआईआर में पुलिस केवल अपने अधिकार क्षेत्र की घटनाओं का मामला दर्ज करती है, लेकिन गंभीर परिस्थितियों में पीड़ित को तुरंत राहत देने के लिए जीरो एफआईआर की व्यवस्था बनाई गई है। इसे “जीरो एफआईआर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि दर्ज करते समय इसे कोई नियमित एफआईआर सीरियल नंबर नहीं दिया जाता, बल्कि इसका नंबर ‘0’ (शून्य) दर्ज किया जाता है।

जीरो एफआईआर दर्ज करने के नियम और कानून

कानूनी आधार: पहले यह व्यवस्था सीआरपीसी (CrPC) की धारा 154 के तहत न्यायपालिका के दिशा-निर्देशों से चलती थी। नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत अब जीरो एफआईआर को पूर्ण वैधानिक मान्यता दे दी गई है। इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना देश के किसी भी पुलिस थाने में संज्ञेय अपराध की शिकायत दर्ज करा सकता है।

केवल संज्ञेय (गंभीर) अपराधों के लिए : यह सुविधा केवल संज्ञेय अपराधों (Cognizable Offences) जैसे कि हत्या, बलात्कार, डकैती, अपहरण, या महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों के मामलों में लागू होती है।

पुलिस मना नहीं कर सकती : कानूनन कोई भी पुलिस अधिकारी अधिकार क्षेत्र का बहाना बनाकर जीरो एफआईआर लिखने से मना नहीं कर सकता। यदि कोई अधिकारी इसे दर्ज करने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई (जैसे बीएनएस के तहत) की जा सकती है।

मुफ्त कॉपी का अधिकार : एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद, इसकी एक प्रति (Copy) शिकायतकर्ता या पीड़ित को बिल्कुल मुफ्त दी जानी अनिवार्य है।

ई-एफआईआर (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम) : नए कानून के तहत ई-प्रणाली से भी शिकायत भेजी जा सकती है, लेकिन रिकॉर्ड पर आने के बाद तीन दिनों के भीतर शिकायतकर्ता द्वारा इस पर हस्ताक्षर करना जरूरी होता है।

जीरो एफआईआर के बाद क्या प्रक्रिया ?

शिकायत दर्ज करने के बाद, वह पुलिस स्टेशन तुरंत शुरुआती जरूरी कानूनी या चिकित्सीय कार्रवाई (जैसे पीड़ित का मेडिकल टेस्ट) शुरू करता है ताकि साक्ष्य नष्ट न हों। प्राथमिक कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद, उस जीरो एफआईआर को संबंधित पुलिस स्टेशन (जहाँ वास्तव में अपराध हुआ है) को ट्रांसफर कर दिया जाता है। जब यह एफआईआर संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने में पहुंचती है, तो वहां की पुलिस इसे एक नियमित सीरियल नंबर देती है और मामले की मुख्य डायरी में दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू करती है।

इस व्यवस्था की शुरुआत मुख्य रूप से 2012 के निर्भया मामले के बाद जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी और भौगोलिक सीमाओं के कारण न्याय में होने वाली देरी को रोकना, अपराध के तुरंत बाद साक्ष्यों (Evidence) को सुरक्षित करना और पीड़ित को थानों के चक्कर काटने से बचाना है।

Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Vidhayak.com

Vidhayak.com जनता और शासन के बीच सशक्त संचार माध्यम है। यह सत्य, सटीक और निष्पक्ष राजनीतिक समाचार, विश्लेषण और विचारों का स्वतंत्र मंच है। पत्रकारिता में लम्बा अनुभव लेने के बाद वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म में जाति, धर्म, समुदाय और किसी पार्टी विशेष की ओर झुकाव के हम पक्षधर नहीं हैं। सितम्बर 2018 में इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत जयपुर से की गई थी। आप अपने समाचार, लेख, विचार, साक्षात्कार के लिए इस मेल पर संपर्क कर सकते हैं - office@vidhayak.com
Get Started
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट हाइजैक, फ्रंटफुट पर कांग्रेस

एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली प्रोटेस्ट में हुई…

जहरीली हुई की द्रव्यवती नदी

जयपुर की लाइफलाइन माने जाने वाली द्रव्यवती नदी अपने अस्तित्व से हर…

पंचायत चुनावों की टाईमिंग में तीन फेज में बदलाव

जयपुर। राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह के सोमवार को…

Vidhayak.com

Your one-stop destination for Politics and Current affairs
Join Our Whatsapp Channel

You Might Also Like

Youth Leadership

पूरा दिल्ली जंतर-मंतर बनने वाला है – सौरव दास

By News Desk Vidhayak.com
Youth Leadership

भारतीय माइनिंग उद्योग को वैश्विक पहचान दे रहे धींवा जापान पहुंचे

By News Desk Vidhayak.com
Youth Leadership

युवा नेता और उद्योगपति धींवा बने राजस्थान स्टेट माइनिंग कमेटी के चेयरमेन

By News Desk Vidhayak.com
Youth Leadership

AAP छोड़ने के बाद हरभजन सिंह के खुलासे से देश की सियासत में भूचाल

By News Desk Vidhayak.com
Vidhayak.com Banner 2 (1)
Facebook Twitter Youtube Instagram
Other Links
  • About Us
  • Editor in Chief
  • Advertisement
  • Privacy Policy
  • Legal
  • Contact Us
More Info
  • News & Views
  • Political Kundali
  • Youth Leadership
  • Vidhayak Exclusive
  • Beyond Politics
  • Corridors of Power

Head Office

1st Floor, 265/05, Sector - 26 Pratap Nagar, Jaipur - 302033 Rajasthan (INDIA)
Office : +91-9991706567
Office ID : office@vidhayak.com
News ID: news.vidhayak@gmail.com
Editor ID: Editor.Vidhayak@gmail.com

(Vidhayak.com ® is a Registered Trademark)

(All legal matters are subject to Jurisdiction of the Jaipur district courts only)

Join our Whatsapp Channel

Powered by Vidhayak.com

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?