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Vidhayak.com > Beyond Politics > सुप्रीम कोर्ट के ‘हंटर’ के बाद भी कुंभकर्णी नींद सोया चिकित्सा विभाग
Beyond Politics

सुप्रीम कोर्ट के ‘हंटर’ के बाद भी कुंभकर्णी नींद सोया चिकित्सा विभाग

News Desk Vidhayak.com
Last updated: 2026/10/05 at 7:59 PM
By News Desk Vidhayak.com
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4 Min Read
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जयपुर। राजस्थान सरकार में ऐसे मामलों की बाढ़ आई हुई है, जिनमें न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक भटक कर, आदेश लेकर लौटे कर्मचारियों, अधिकारियों को न्याय के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। आईपीएस से लेकर डॉक्टर्स तक भी की फाइलें भी टेबल दर टेबल घूम रही हैं, लेकिन न्याय मिलना मुश्किल होता जा रहा है। ताजा मामला है सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद एफएमजी यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स डॉक्टरोें को आमरण अनशन करना पड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला?

राजधानी जयपुर में बीते कई दिनों से चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के बाहर सड़क पर डॉक्टर्स बैठे हैं। आमरण अनशन कर रहे हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी और कोर्ट ने दो सप्ताह में इन डॉक्टर्सको स्टाईपेंड देने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक यह डॉक्टर्स बिना किसी लिखित आश्वासन, बिना किसी समाधान आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हैं। आलम यह है कि विभाग समाधान निकालने की बजाय कुंभकरर्णी नींद सोया हुआ है।

विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करके राजस्थान लौटे और सरकारी अस्पतालों में लगातार ड्यूटियां दे रहे इन डॉक्टर्स को न तो स्टाईपेंड मिल रहा है न ही जिन्हें हम भगवान का दर्जा देते हैं, उनकी भगवान सुन रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नेशनल मेडिकल कमीशन की गाइडलाइंस के अनुसार इन्हें मासिक 21700 रुपए का स्टाईपेंड मिलना है, लेकिन उसे देने में भी सरकार की जेबें फट रही हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों में क्या?

इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्वोच्च अदालत में जजों की पीठ ने राजस्थान सरकार के ढुलमुल रवैये को आढेÞ हाथ लिया। कोर्ट में जब सरकारी वकीलों ने बजट की कमी का रोना रोया, तो अदालन ने एक झटके में उसे खारिज करते हुए साफ कर दिया कि डॉक्टरों की मेहनत की कमाई को रोकने के लिए पैसों की तंगी का बहाना नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया और साफ आदेश दिए कि इन डॉक्टरों का पुराना बकाया और स्टाईपेंड खातों में ट्रांसफर किया जाए। ऐसा नहीं किए जाने की स्थित में स्वास्थ्य विभाग के सचिव को खुद दिल्ली हाजिर होकर जवाब देना पडेÞगा। कोर्ट की इतनी सख्ती के बावजूद भी डॉक्टर सड़क पर बैठने को मजबूर हैं और सरकार बजट का रोना रो रही है।

हक मांगने वाले डॉक्टर्स ही एफआईआर दर्ज

अपने हक की लड़ाई लड़ रहे डॉक्टर्स को स्टाईपेंड देने की बजाय सरकार ने एफआईआर का तोहफा दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक सरकार 35 से ज्यादा इंटर्न के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा चुकी है। यह डॉक्टर अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं लेकिन आदर्श नगर थाने में सरकार ने इनके खिलाफ मामले दर्ज करवा दिए हैं। यह भी जानकारी में आया है कि डॉक्टर्स पर प्रेशर बनाने के लिए मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्षों की ओर से थ्रेट नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि डॉक्टर्स धरना छोड़कर काम पर नहीं लौटे तो इंटर्नशिप रोक दी जाएगी।

इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर्स के साथ अब देश के बडेÞ मेडिकल संगठन भी साथ आ गए हैं। इनमें एफएआईएमए, एआईएमएसए और एएफए प्रमुख हैं। इन संगठनों ने डॉक्टर्स के पक्ष में मोर्चा खोल दिया है। जिसके बाद यह लड़ाई केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि देश के पूरे मेडिकल सिस्टम में सरकारों द्वारा की जा रही इस तरह की धांधी के खिलाफ एक राष्टव्यापी लड़ाई का रूप ले रही है।

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