चंडीगढ़। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) में महीनों से चल रही अनिश्चितता और अंदरूनी कलह पर विराम लगाते हुए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने शुक्रवार को बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। पूर्व ओलंपियन और जालंधर कैंट से तीन बार के विधायक परगट सिंह को तत्काल प्रभाव से पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
यह नियुक्ति निवर्तमान अध्यक्ष और लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद हुई है। कांग्रेस आलाकमान ने 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह रणनीतिक बदलाव किया है ताकि राज्य में बंटी हुई पार्टी को एकजुट किया जा सके।
राजा वड़िंग का इस्तीफा और गुटीय तनाव
पंजाब कांग्रेस के शीर्ष पद पर यह बदलाव पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर चल रहे गहरे मतभेदों का परिणाम है। राजा वड़िंग ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। वड़िंग साल 2022 से इस पद पर थे, जब उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू की जगह ली थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के गुट राजा वड़िंग के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। इस अंदरूनी खींचतान और असंतोष के कारण पंजाब कांग्रेस की सांगठनिक ताकत कमजोर हो रही थी, जिसे देखते हुए आलाकमान ने नेतृत्व परिवर्तन का कड़ा फैसला लिया। पार्टी ने वड़िंग के योगदान की सराहना करते हुए विदाई दी है।
खेल के मैदान से सियासत के शिखर तक
61 वर्षीय परगट सिंह भारतीय खेल और राजनीति का एक जाना-माना चेहरा हैं।
- हॉकी के दिग्गज : परगट सिंह भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने 1990 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। इसके अलावा उन्होंने 1992 और 1996 के ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम की कप्तानी की थी।
- राजनीतिक सफर : हॉकी से संन्यास लेने के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया। वे जालंधर कैंट से लगातार तीन बार के विधायक हैं और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री (शिक्षा और खेल विभाग) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
परगट सिंह के सामने मुख्य चुनौतियां
आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में अब बहुत कम समय बचा है, ऐसे में नए कप्तान के रूप में परगट सिंह के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियां हैं:
- अंदरूनी गुटबाजी को खत्म करना : पंजाब कांग्रेस वर्तमान में चन्नी, रंधावा, और वड़िंग समर्थकों जैसे कई अलग-अलग धड़ों में बंटी हुई है। परगट सिंह की निर्विवाद और साफ-सुथरी छवि के कारण आलाकमान को उम्मीद है कि वे सभी गुटों को एक साथ लाने में सफल होंगे।
- ‘आप’ और भाजपा का मुकाबला : पंजाब में इस समय आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है और मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए कांग्रेस को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना होगा।
- कैबिनेट को बरकरार रखना : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आधिकारिक बयान के अनुसार, संक्रमण काल के दौरान राज्य में मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष और समितियों के अध्यक्ष अपने पदों पर बने रहेंगे। परगट सिंह को पुरानी टीम के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होगा।
इस बदलाव के साथ ही कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में भी आराधना मिश्रा को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी 2027 के चुनावी राज्यों के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार है।


