राजस्थान की राजनीति में गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2026) के दिन एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और भरतपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया है। सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने पार्टी की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए और संगठन छोड़ने का एलान किया।
घटनाक्रम और इस्तीफे की वजह
यह पूरा विवाद हाल ही में संपन्न हुए राजस्थान शहरी निकाय चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुआ। भरतपुर और डीग जिलों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन और एक भी बोर्ड न बन पाने पर विश्वेंद्र सिंह का गुस्सा फूट पड़ा।
टिकट वितरण पर आरोप: विश्वेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि स्थानीय जिला अध्यक्षों ने समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपने चहेतों को टिकट बांटे, जिसके कारण पार्टी की करारी हार हुई।
डोटासरा से सीधा टकराव: सिंह ने अपनी हार का ठीकरा सीधे तौर पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर फोड़ा। उन्होंने डोटासरा से इस्तीफे की मांग की और उन पर अपने कार्यकाल के दौरान रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने तथा परीक्षा धांधली जैसे कई गंभीर आरोप भी मढ़े।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश: विश्वेंद्र सिंह के इन सार्वजनिक बयानों के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश आलाकमान को भेज दी. लेकिन पार्टी कोई सख्त कदम उठाती, उससे ठीक पहले सिंह ने खुद सोशल मीडिया पर अपनी विदाई का संदेश पोस्ट कर दिया।
‘घुट-घुट कर जीने से स्वाभिमान बेहतर’
विश्वेंद्र सिंह ने अपने बयान में लिखा कि वे पार्टी की “गलत नीतियों और तौर-तरीकों” के साथ आगे कदमताल नहीं कर सकते। उन्होंने अपने पूर्वजों के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा— “घुट-घुट कर जीने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलविदा कहना ही बेहतर है।” हालांकि मीडिया से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी औपचारिक लिखित इस्तीफा नहीं भेजा है, बल्कि पार्टी से अपनी राहें जुदा करते हुए केवल ‘अलविदा’ कहा है।
कांग्रेस का रुख और डोटासरा का जवाब
इस पूरे घटनाक्रम पर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने शुरुआती बयानों में इसे भाजपा का ‘टूलकिट’ और दुष्प्रचार करार दिया था। डोटासरा का कहना था कि सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर फैसला नहीं लिया जा सकता और पार्टी अपनी आंतरिक प्रक्रिया के तहत मामले को देख रही है. दूसरी तरफ, महिला कांग्रेस और संगठन के कुछ अन्य पदाधिकारियों ने सिंह पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।
सियासी गलियारों पर क्या होगा असर?
विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस से अलग होना पार्टी के लिए पूर्वी राजस्थान (विशेषकर ब्रज क्षेत्र) में एक बड़ा झटका माना जा रहा है। भरतपुर, धौलपुर और करौली जैसे जिलों में जाट समुदाय की बड़ी आबादी है. विश्वेंद्र सिंह भरतपुर राजघराने के मुखिया होने के नाते इस वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखते हैं। उनके जाने से कांग्रेस के इस गढ़ में दरार आ सकती है।
बीजेपी में जाने की अटकलें: राजनीतिक हलकों में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। सिंह साल 2008 में भाजपा छोड़कर ही कांग्रेस में शामिल हुए थे। वर्तमान में राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार के कुछ मंत्रियों के साथ उनके अच्छे तालमेल की भी चर्चाएं हैं।


