टोक्यो (जापान)। भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी एवं औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधि मण्डल इन दिनों जापान में है। इस प्रतिनिधि मंडल में राजस्थान के खनन एवं प्राकृतिक पत्थर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए युवा उद्यमी अनिल धींवा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी खास मौजूदगी दर्ज करवा रहे हैं।
टोक्यो से प्राप्त जानकारी के अनुसार 24-27 अगस्त तक जापान में इस डेलीगेशन ने व्यापार एवं निवेश बढ़ाने के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान एवं विकास, स्थानीयकरण, कौशल विकास, आधुनिक विनिर्माण और वैश्विक बाजारों तक पहुंच जैसे मसलों पर अहम बातचीत की है। इस चार दिवसीय यात्रा के दौरान टोक्यो, नागोया, ओसाका और कोबे में भारतीय एवं जापानी उद्योग जगत के साथ व्यापार, निवेश, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, बाजार पहुंच, क्रिटिकल मिनरल्स और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक संवाद हुआ है।
जापान द्वारा भारत में अगले दशक में 10 ट्रिलियन जापानी येन के निवेश की दिशा में प्रतिबद्धता, दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक विश्वास और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी की संभावनाओं को दशार्ती है। इस डेलीगेशन का अहम हिस्सा बने युवा उद्यमी अनिल धींवा ने कहा है कि भारत-जापान साझेदारी को केवल पूंजी निवेश तक सीमित न रखते हुए तकनीक, नवाचार, विनिर्माण और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
धींवा के मुताबिक भारत अब केवल दुनिया का एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और निवेश का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मेक इन इंडिया और स्थानीय से वैश्विक भारत की औद्योगिक परिवर्तन यात्रा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। भारत की बढ़ती क्षमताएं-उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, औषधि और उन्नत सामग्री-भारत को वैश्विक औद्योगिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिला रही है। भारत को केवल क्रिटिकल मिनरल्स के खनन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें अन्वेषण और प्रसंस्करण से लेकर मूल्यवर्धन, पुनर्चक्रण और उन्नत विनिर्माण तक पूरी वैश्विक मूल्य शृंखला में अपनी मजबूत भूमिका स्थापित करनी होगी।
इस जापान यात्रा में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, अत्याधुनिक खनन तकनीक, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, पुनर्चक्रण और सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं पर सभी संवादों में विशेष बल दिया गया है। इस दल के प्रतिनिधियों ने जापान के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, तकनीकी सहयोग, आधुनिक प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण तथा अनुसंधान एवं विकास में दीर्घकालिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
टोक्यो से उद्यमी अनिल धींवा से मिली जानकारी के अनुसार, क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। भारत और जापान को मिलकर नए स्रोतों की खोज, अत्याधुनिक खनन तकनीक, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और मूल्यवर्धन पर काम करना चाहिए। अफ्रीका जैसे संसाधन-संपन्न क्षेत्रों के साथ साझेदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारी केवल खनिज सुरक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि स्थानीय मूल्यवर्धन, तकनीकी हस्तांतरण, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा देना चाहिए।


