जयपुर। राजस्थान में अंता के उपचुनाव ने ओछी राजनीति, बेहिसाब बयानबाजी और राजनीतिक वैमनस्यता के ऐसे बीच बोए हैं, जिनसे होने वाली फसल भविष्य में जब नेता काटेंगे, तो मुश्किलों से दो चार होना पड़ेगा। सवाल होंगे, जवाब भी देने पडेंÞगे। आपसी कटुता, ओछी बयानबाजियां और वरिष्ठ नेताओं को लेकर बार-बारी एग्रेसिव हुए निर्दलीय प्रत्याशी Naresh Meena के रिएक्शंस पूरे चुनाव में चर्चा में बने रहे।
अंता के इस उपचुनाव में बयानबाजियों के बीच युवा नेता नरेश मीणा ने पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, फिर प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, तो कभी अशोक गहलोत पर टिप्पणियां की। लेकिन टिप्पणियां करते-करते नरेश मीणा हिण्डोली से कांग्रेस विधायक अशोक चांदना को लेकर मीडिया में फिसली जुबान से बयानबाजी कर गए। इसकी प्रतिक्रिया में विधायक अशोक चांदना ने नरेश को नसीहत दे डाली। अपनी सलाह में संयत और संयम तरीके से अशोक चांदना ने नरेश को नसीहत देते हुए कहा, ‘सियासत में व्यवहार सबसे अहम होता है। नरेश मीणा में दम है, लेकिन केवल इंजन मजबूत होने से कुछ नहीं होता, अगर पटरी सही न हो, तो आगे नहीं बढ़ती।’ चांदना की यही प्रतिक्रिया एक वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी को अखर गई।
चेतावनी – ‘हिसाब चुकता किया जाएगा’
भारतीय राजस्व सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और सेंट्रल जीएसटी में बतौर प्रिंसिपल कमिशनर सेवाएं दे रहे सुग्रीव मीणा ने ट्विटर पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए विधायक अशोक चांदना को चेतावनी दी है। वरिष्ठ पत्रकार अवधेश पारीक की एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट पर रिएक्शन देते हुए आईआरएस सुग्रीव मीणा ने कहा, ‘सब हिसाब चुकता किया जाएगा 2028 में, इसको हिंडोले मिलेंगे।‘ आईआरएस अधिकारी की इस प्रतिकिया को लेकर सोशल मीडिया और सत्ता के गलियारों में चर्चा हो रही है। चर्चा यह भी है कि नरेश मीणा के बचकाने बयानों के बीच चांदना के संयम बरतने के बावजूद आईआरएस सुग्रीव मीणा ने चेतावनी भरा लहजा अपनाया, जबकि वह खुद एक प्रशासनिक और जिम्मेदारी भरे पद पर सेवाएं दे रहे हैं। गौरतलब है कि सुग्रीव मीणा 2024 के भारतीय राजस्व सेवा के पैनल 2024 में चार अन्य अधिकारियों के साथ प्रमोट होकर प्रिसिंपल कमिशनर पद पर प्रमोट हुए थे। आईआरएस सुग्रीव मीणा राजस्थान के राजगढ़, अलवर से ताल्लुक रखते हैं और सरकारी सेवाओं में जिम्मेदार पद पर होने के बावजूद ट्विटर पर राजनीतिक टिप्पणियां अक्सर करते देखे जाते हैं।
हालांकि आईआरएस सुग्रीव मीणा की इस प्रतिक्रिया पर विधायक अशोक चांदना ने कोई रिएक्शन नहीं दिया है, लेकिन अंता चुनाव के दौरान जिस अंदाज में विधायक चांदना ने बात रखी, उसे कांग्रेस में सैकंड लेयर लीडरशिप का वरिष्ठ नेताओं के पक्ष में स्टैंड लेने और खुद संयम शब्दों से पक्ष रखने का बेहतर तरीका माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि चांदना आने वाले वर्षों में कांग्रेस के लिए तैयार हो रही नई लीडरशिप के मुख्य चेहरों में एक हो सकते हैं, जिसकी झलक उनकी क्रिया-प्रतिक्रियाओं में देखने को मिल रही है।
बहरहाल देखने वाली बात होगी कि आईआरएस अधिकारी प्रशासनिक पद पर रहने के बावजूद नरेश मीणा के पक्षधर होकर क्या आगे भी टीका-टिप्पणियां करते रहेंगे, या सिलसिला यहीं थमने वाला है? यह भी देखने वाली बात होगी कि अशोक चांदना ने जितने संयम से युवा नेता नरेश मीणा को समझाने का प्रयास किया, क्या अपने से उम्र में बडेÞ और आईआरएस को भी समझाने की जहमत उठाएंगे?


