केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच खोल दी है। 2006 में मलेशियन सिविल इंजीनियर ली सी बीन ने आत्महत्या कर ली थी। इस समय ज्ञानेश कुमार पीडब्यूडी सचिव थे। मलेशियन इंजीनियर ली सी बीन केरल स्टेट ट्रांस्पोर्ट प्रोजेक्ट के तहत एम.सी. रोड के अपग्रेडेशन का काम कर रहे पीएटीआई-बीईएल कंसोर्टियम से जुडे थे।
मलेशियन इंजीनियर की आत्महत्या से जुडे जिस मामले को खोला गया है उसमें इंजीनियर ली सी बीन ने आरोप लगाया था कि सड़क के काम का भुगतान जारी करने के बदले तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव ज्ञानेश कुमार ने उनसे रिश्वत मांगी थी। यह सड़क वर्ल्ड बैंक के एक प्रोजेक्ट के अधीन बन रही थी।
मामले को दुबारा खोलते समय गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि 2006 में हुई विजिलेंस जांच बाहरी दबाव के कारण प्रभावित हुई थी, जिसकी अब निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
ज्ञानेश कुमार का केरलम सफर
सीईसी ज्ञानेश कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन होकर 1988 बैच के जरिए केरल काडर में सेवाएं देने पहुंचे। शुरुआती दस साल उन्होंने अलग-अलग जिलों में प्रशासनिक पद और फील्ड पोस्टिंग की। 2005 से 2007 तक सचिव, केरलम लोक निर्माण विभाग एवं प्रोजेक्ट डायरेक्टर, केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट रहे। इसी कार्यकाल में मलेशियन इंजीनियर ने आत्महत्या की, जिसकी शिकायत और विजिलेंस जांच हुई, जिसे उस वक्त क्लोज कर दिया गया था।
पुराने मामले में जांच के क्या हैं कानून?
किसी भी मौजूदा या पूर्व अफसर के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से लिखित इजाजत धारा 17(ए) के तहत लेना जरूरी है। बिना इस मंजूरी के की गई कोई भी जांच या एफआईआर अदालत में स्टैंड नहीं कर पाती। इधर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के मुताबिक बिना किसी ठोस वजह के 10-15 साल पुराने मामलों को दोबारा खोलना गलत है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक लंबे समय बाद जांच शुरू करने को अदालत गलत नीयत मानती है, जिससे केस खारिज हो सकता है।


