गांधीनगर। गुजरात काडर में इन दिनों राज्य सरकार के प्रशासनिक शुद्धीकरण अभियान ऑपरेशन गंगाजल से हड़कंप मचा हुआ है। गुजरात की भूपेन्द्र पटेल सरकार की ओर से दागी अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए राज्य स्तर पर यह अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत 2010 बैच के आईएएस गौरव दहिया और 2011 बैच के आईएएस के. राजेश को अखिल भारतीय सेवा नियमों का उपयोग करते हुए समय से पहले जबरन रिटायर कर दिया है।
प्रशासन में भ्रष्टाचार खत्म करने, अनुशासनात्मक कार्रवाई और गंभीर कदाचार का सामना कर रहे अधिकारी इस समय सरकार के निशाने पर हैंं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन गंगाजल के तहत आने वाले दिनों में विभागीय जांच के दायरे में चल रहे कुछ बडेÞ अफसर भी शिकार हो सकते हैं, जो सरकार के रडार पर हैं।
IAS गौरव दहिया क्यों आए निशाने पर
वर्ष 2019 में आईएएस गौरव दहिया (2010 बैच)को उनके निजी जीवन से जुडे गंभीर विवादों के बाद निलंबित किया गया था। दिल्ली की एक महिला की शिकायत के बाद एक 5 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसने आईएएस गौरव दहिया पर कदाचार, द्विविवाह, नैतिक अधमता और धोखाधड़ी के आरोपों को सही माना। मामला चलता रहा, लेकिन दहिया को भी इतना अंदाजा नहीं था कि उन्हें इसके चलते नौकरी खोनी पड़ जाएगी। आईएएस गौरव दहिया के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में रहने के दौरान भी उनके खिलाफ कई शिकायतें आई। जुलाई 2023 में उनका निलंबन बहाल कर दिया गया और फिलहाल वे गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर सेवाएं दे रहे थे, जहां से उन्हें सरकार ने जबरन सेवामुक्त कर दिया है।
IAS के. राजेश इसलिए हुए शिकार
2011 बैच के आईएएस लंबे समय से सस्पेंशन में चल रहे थे। 2022 में सीबीआई ने उनके खिलाफ रिश्वतखोरी, जबरन वसूली और सरकारी पद का दुरुपयोग का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार तक कर लिया था। इस गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी के. राजेश के खिलाफ मनी लॉडिंÑग के तहत जांच शुरू कर दी थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार के. राजेश के लिए समस्या बना सुरेन्द्र नगर कलक्टर का कार्यकाल। उस दौरान रिश्वत के बदले बंदूक लाइसेंस का रैकेट चलाने का आरोप के. राजेश पर लगा। जांच में जिला पुलिस की नकारात्मक सुरक्षा रिपोर्ट के बावजूद पैसे लेकर 271 हथियार लाइसेंस जारी करने के मामले ने आईएएस के. राजेश की घेराबंदी कर दी। इसके अलावा अवैध भूमि आवंटन से जुड़े भ्रष्टचार मामले में भी उनका नाम जुड़ा और ईडी ने उनकी 1.55 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर दी थी। परिणामस्वरूप अब के. राजेश को गुजरात काडर से आउट कर दिया गया है।
गुजरात सरकार के ‘ऑपरेशन गंगाजल’ के तहत दागी आईएएस (IAS) अधिकारियों को हटाने के लिए जिस कानूनी आधार का उपयोग किया गया है, वह प्रशासनिक कानून का एक बेहद शक्तिशाली हिस्सा है। आमतौर पर इसे “डेड वुड को छांटना” (Weeding out dead wood) कहा जाता है।
FR 56(j) और AIS Rules क्या हैं?
अधिकारियों को जबरन या अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने के लिए दो अलग-अलग नियम काम करते हैं, जो कर्मचारी की श्रेणी पर निर्भर करते हैं। इनमें एक है AIS (DCRG) Rules, 1958 का नियम 16(3) और दूसरा है – फंडामेंटल रूल (FR) 56(j).
AIS (DCRG) Rules, 1958 का नियम 16(3): चूंकि आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और आईएफओएस (IFoS) अधिकारी अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अंतर्गत आते हैं, इसलिए उन पर यह नियम लागू होता है। इसके तहत केंद्र सरकार को (राज्य सरकार की सिफारिश पर) जनहित में किसी भी अधिकारी को समय से पहले रिटायर करने का पूर्ण अधिकार (Absolute Right) है।
फंडामेंटल रूल (FR) 56(j) : यह नियम केंद्रीय सिविल सेवाओं (CCS) के ग्रुप ए, बी, सी और डी के अन्य सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर लागू होता है। यह भी सरकार को जनहित में अक्षम या संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मचारियों को सेवामुक्त करने की शक्ति देता है।
सरकार किसी भी अधिकारी पर कभी भी यह नियम लागू नहीं कर सकती। इसके लिए अधिकारी को 50 वर्ष की आयु पार कर ली हो, या 15 या 25 वर्ष की अर्हक सेवा (Qualifying Service) पूरी कर ली हो। (गुजरात के मामले में के. राजेश 2011 बैच और गौरव दहिया 2010 बैच के हैं, जिन्होंने अपनी सेवा के 15 वर्ष के पड़ाव के आसपास का समय पूरा कर लिया है)।


