जयपुर। पावर कॉरीडोर्स में पॉलिटिकल दखल कोई नई बात नहीं। लेकिन ताजा मामले में राजस्थान पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 3 पुलिस अधीक्षकों के तबादलों को लेकन नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। डोटासरा ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पंचायत चुनाव आचार संहित लगने के ऐन पहले जिन आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए उनमें से तीन ऐसे हैं, जिन्हें केवल इसलिए बदला गया है कि उन्होंने निकाय चुनावों में पार्षद चोरी में सरकार की मदद नहीं की।
गोविंद सिंह डोटासरा ने शनिवार को जारी आईपीएस तबादला सूची शेयर करते हुए आरोप लगाए हैं कि, ‘भाजपा सरकार की बौखलाहट तो देखिए कि पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही निकाय चुनाव में पार्षद की चोरी के मामले में मदद नहीं करने वाले सीकर, दौसा और सिरोही के पुलिस अधीक्षकों को हटाने का फरमान जारी कर दिया गया है। जनता के जनादेश से भाजपा इतनी खौफजदा है कि चुनाव के बीच ही पुलिस अधीक्षकों को बदला जा रहा है। आखिर इन तबादलों के पीछे क्या मजबूरी है? कान खोलकर सुन ले भाजपा सरकार, पुलिस प्रशासन जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए है, सत्ता के चुनावी खेल के लिए नहीं। पुलिस प्रशासन के दम पर प्रधान और जिला प्रमुख बनाने का सपना भाजपा का कभी पूरा नहीं होगा। लोकतंत्र की लूट नहीं होने देंगे। पंचायती राज चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होकर रहेगा।’
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के इस बवाल पर सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों और पुलिस महकमे में इस सूची को लेकर बीते 20 घंटे से बवाल मचा हुआ है। इस तबादला सूची में 2009 बैच के IPS अजय सिंह, IPS रामेवश्वर सिंह, 2010 बैच के IPS विकास शर्मा, IPS डॉ. राजीव पचार, IPS मनीष अग्रवाल, 2013 बैच के IPS संजीव नैन, IPS योगेश गोयल, 2015 बैच के IPS सतनाम सिंह, 2016 बैच के IPS पीयूष दीक्षित, IPS पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़, 2018 बैच के IPS कुंदन कंवरिया, 2019 बैच के IPS प्रवीण नायक नूनावत, 2022 के IPS अजेय सिंह राठौड़ और 2022 बैच के IPS आदित्य काकडे शामिल हैं। लेकिन मुख्य रूप से गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने आरोपों में सीकर, दौसा और सिरोही पुलिस अधीक्षक के तबादले भाजपा सरकार की बौखलाहट बताते हुए भाजपा को खौफजदा बताया है।


