चौहटन (बाड़मेर)। चौहटन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता आदूराम मेघवाल ( Aduram Meghwal ) ऐसे विधायक हैं, जिन्होंने ग्रामीण राजस्थान की धरती से उठकर राजनीति में अपना कद बनाया है। अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित इस सीट पर मेघवाल का नाम बाड़मेर में विकास और जनसेवा का पर्याय बन चुका है। हाल ही में भाजपा के प्रदेश संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। मेघवाल न केवल स्थानीय मुद्दों पर मुखर हैं, बल्कि केंद्र की योजनाओं को ग्रामीण स्तर पर पहुंचाने में भी अग्रणी रहे हैं।
पंचायत स्तर से विधानसभा तक पहुंचे मेघवाल
चौहटन क्षेत्र के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे आदूराम मेघवाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही प्राप्त की। 1990 के दशक में वे स्थानीय पंचायत स्तर पर सक्रिय हुए, जहां उन्होंने ग्रामीण विकास और दलित उत्थान के मुद्दों पर काम शुरू किया। भाजपा से जुड़ने से पहले वे सामाजिक कार्यों में लगे रहे, खासकर मेघवाल समुदाय के युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने में। 2000 के दशक के मध्य में भाजपा ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें जिला स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपीं। 2018 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ते हुए उन्होंने चौहटन सीट पर कदम रखा। तब से वे लगातार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते आ रहे हैं। मेघवाल का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा है; वे हार-जीत के चक्रव्यूह से गुजरे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उनकी सादगी और जमीन से जुड़ाव ने उन्हें स्थानीय नेताओं में अलग पहचान दी।
विकास केन्द्रित मुद्दों से बनी पहचान
राजस्थान विधानसभा में आदूराम मेघवाल ने हमेशा विकास-केंद्रित मुद्दे उठाए हैं। जल संकट, बेरोजगारी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर उनकी आवाज सबसे मुखर रही है। 2018 के सत्र में उन्होंने चौहटन क्षेत्र में नहरों की मरम्मत और सिंचाई सुविधाओं पर विशेष बहस छेड़ी, जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने कई परियोजनाओं को मंजूरी दी। वे दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए भी सक्रिय रहे, जैसे कि एससी/एसटी एक्ट के सख्त क्रियान्वयन और आरक्षण नीतियों में सुधार। विधानसभा में उन्होंने केंद्र की ‘उज्ज्वला योजना’ और ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ को स्थानीय स्तर पर लागू करने के लिए सवाल उठाए। पर्यावरण मुद्दों पर भी उनकी रुचि रही; बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाके में वनरोपण और जल संरक्षण पर वे कई प्रस्ताव ला चुके हैं। मेघवाल की बहसें न केवल चौहटन तक सीमित रहीं, बल्कि पूरे मारवाड़ क्षेत्र को प्रभावित करती रहीं।
चौहटन में जनता के नेता बनकर उभरे
विधायक रहते हुए आदू राम मेघवाल ने चौहटन में सैकड़ों किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कई स्कूलों को अपग्रेड कराया और बालिकाओं के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू कीं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के तहत उन्होंने मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की व्यवस्था की, जो दूरस्थ गांवों तक पहुंचती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान मेघवाल ने राहत कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई, जहां उन्होंने हजारों परिवारों को मास्क, सैनिटाइजर और राशन वितरित किया, वहीं किसानों के लिए उन्होंने बीमा योजनाओं का प्रचार किया और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजा दिलवाया। इन प्रयासों से चौहटन के हजारों परिवार लाभान्वित हुए। मेघवाल की छवि एक ऐसे नेता की है जो विधानसभा सत्रों के अलावा भी जनता के बीच रहते हैं, शिकायतें सुनते हैं और समाधान निकालते हैं।

पहला चुनाव हारे, 2023 में पहुंचे विधानसभा
राजस्थान विधानसभा तक पहुंचने के लिए आदू राम मेघवाल ने बड़ा संघर्ष किया। विधानसभा चुनाव 2018 में आदू राम मेघवाल पहली बार मैदान में उतरे। इस चुनाव में कांग्रेस के पद्माराम हालांकि 4262 वोटों से विजयी रहे, लेकिन आदू राम का संघर्ष, उनकी मेहनत और जनता से जुड़ाव जग जाहिर हुआ। इस चुनाव में पद्माराम को कुल 83,601 वोट मिले और आदू राम को 79,339 वोट मिले। वोट शेयर में आदू राम केवल 3 प्रतिशत ही कमतर रहे। लेकिन विधानसभा चुनाव 2023 में आदू राम का वक्त बदला। इस बार आदू राम को 43.46 प्रतिशत वोट शेयर मिला और कुल 103,205 वोट हासिल किए। इसी चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंदी पद्माराम मेघवाल थे, जिन्होंने कांग्रेस के सिंबल से चुनाव लड़कर कुल 101,777 वोट हासिल किए।
चौहटन विधानसभा
चौहटन विधानसभा क्षेत्र राजस्थान की सबसे बड़ी सीटों में से एक है, जहां रेगिस्तानी इलाका और सीमावर्ती स्थिति चुनावी समीकरण को जटिल बनाती हैं। 2023 चुनाव में भाजपा के आदू राम मेघवाल और कांग्रेस के पद्माराम मेघवाल के अलावा तरुण राय को 22,149 वोट, भरतराम को 4272 वोट और नोटा को कुल 3901 वोट मिले। चौहटन में चुनावी समीकरणों में भाजपा का मजबूत संगठन और केन्द्र की योजनाओं का प्रचार फायदेमंद रहा, लेकिन स्थानीय मुद्दों जैसे जल संकट के मुद्दे प्रभावी रहे। जातिगत समीकरण भी चोहटन में निर्णायक हैं। यहां एससी आरक्षित सीट होने से मेघवाल समुदाय (लगभग 35%) प्रमुख है, जो भाजपा का वोट बैंक है। जाट (20%), राजपूत (15%) और मुस्लिम (10%) वोटर भी प्रभाव डालते हैं। दलित-जाट गठजोड़ कांग्रेस को फायदा पहुंचाता है, जबकि भाजपा का आरएसएस सवर्णों को साधने में कामयाब रहे हैं।
1977 से 2023 तक के चुनाव परिणाम
1977 : अब्दुल हादी (कांग्रेस) 15,333 वोटों से जीते।
1980 : भगवानदास (कांग्रेस-आई) 4,301 वोटों से जीते।
1985 : अब्दुल हादी (कांग्रेस) 6,543 वोटों से जीते।
1990 : अब्दुल हादी (कांग्रेस) 10,541 वोटों से जीते।
1993 : भगवानदास (निर्दलीय) 24,602 वोटों से जीते।
1998 : अब्दुल हादी (कांग्रेस) 25,820 वोटों से जीते।
2003 : गंगाराम चौधरी (भाजपा) 6,573 वोटों से जीते।
2008 : पद्माराम (कांग्रेस) 23,903 वोटों से जीते।
2013 : तरुण राय कागा (भाजपा) 23,526 वोटों से जीते।
2018 : पद्माराम (कांग्रेस) 4,262 वोटों से जीते।
2023 : आदू राम मेघवाल (भाजपा) 1,428 वोटों से जीते।
चौहटन सीट में मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा ही प्रतिद्वंदी के तौर पर चुनावी रण में दम दिखाते रहे हैं। 1977 से 2023 तक कुल 11 विधानसभा चुनावों में 6 बार कांग्रेस, 3 बार भाजपा, 1 बार निर्दलीय और 1 बार कांग्रेस-आई ने जीत दर्ज की है।
Contact Info.
Aduram Meghwal MLA
Constituency : Chohtan (Barmer)
DOB : 03 Dec. 1965
Phone : 9414106404 / 90013 43013
Email : adurammeghwal@gmail.com
Address : 546/6, Police Station Gali, Chohtan, Barmer – 344702


