जयपुर शहर की स्थापना 18 नवंबर 1727 में जब महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने की तो कभी नहीं सोचा होगा कि मेरे अपने लोग, मेरे अपने शहर की नसों में जहर घोल देंगे। हजारों मौतों पर मातम नहीं मनाएंगे, बल्कि जीत के जश्न सजाएंगे। हम जयपुर में रहते हैं, खुद को र्स्माट सिटी कहते हैं। हम यूनेस्को की विश्व धरोहर होने का गर्व मनाते हैं, लेकिन कभी भी एक मिनट के लिए ठहर कर उन चीखों को सुनने की जहमत नहीं उठाते, जो पानी पर तैरती लाशों ने अपने आखरी वक्त में पुकारी थी। जयपुर शहर का सबसे खूबसूरत जल महल आज अनगिनत मछलियों की मौतों का गवाह बन गया है।
हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार, हमारा पर्यावरण और नागरिक जिम्मेदारियों की हमने ही धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। राजस्थान सरकार की जयपुर राजघराने से ही ताल्लुक रखने वाली पर्यटन मंत्री दीया कुमारी जयपुर के 300 वें स्थापना दिवस के जश्न नवंबर से सालभर तक मनाने की तैयारियां तो कर रही हैं, लेकिन इंसानी लापरवाही से पैदा हुई कलेजा चीरने वाली बदबू और मान सागर झील में रोज मछलियों की मौतों को लेकर फिक्रमंद नजर नहीं आतीं। गोल्डन ट्राएंगल के लालच में जयपुर आने वाले दुनियाभर के लाखों पर्यटकों के सामने शहर की इज्जत नीलाम करते इस सड़ांध मारते जलमहल की दुर्दशा हम सबको शर्मासार करने के लिए काफी है।
हम सबने मिलकर इस ऐतिहासिक धरोहर का गला घोंट दिया है। हमने इन मछलियां, जलीय जीवों की जिंदगी तबाह कर दी है। Vidhayak.com के जरिए हम चाहते हैं कि इस भयानक त्रासदी को आपको दिखाएं। हम चाहते हैं कि हवामहल, जल महल और आमेर का किला देखने वाने वाले देश-विदेश के करीब 80 लाख पर्यटाकों को हम धोखे में न रखें। हम चाहते हैं कि सरकार का अहम हिस्सा पर्यटन मंत्री दीया कुमारी महलों और राजनीतिक गलियारों से जरा बाहर निकलें और जल महल की भी सुध लें। नगर निगम सुध ले। …और कोई सुध न ले, तो आप और हम घरों से निकलें और इस बेमिसाल धरोहर की रक्षा के लिए कुछ करें। कुछ भी जो आप कर सकते हैं। जो हम मिलकर कर सकते हैं।


