भोपाल। अमित शाह और मोदी का जादू धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। 2019 के चुनावों से पहले यह जादू किस स्तर पर होगा, इस बात से बहुत सारी सीटें इधर-उधर होंगी। राजस्थान में भाजपा की टाइट हालत ने शाह और मोदी का पूरा ध्यान मध्य प्रदेश पर टिका दिया है। शाह के दौरे और उनके रेस्पॉन्स का जायजा लें या मोदी और उनकी प्रतिक्रियाओं का, तो एक बात साफ है कि शाह और मोदी मध्यप्रदेश को खोना नहीं चाहेंगे।

हालांकि खोना तो शाह राजस्थान को भी नहीं चाहेंगे, लेकिन स्थानीय भाजपा विरोधी सुरों को दबाने में नाकाम हो रहे हैं। इधर मानवेन्द्र सिंह जसोल का कांग्रेस में जाना भी राजस्थान में भाजपा को ऐन चुनावों से पहले का बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे मारवाड़ भाजपा विरोधी होगा। राजपूतों में कांग्रेस के प्रति झुकाव बढ़ेगा। ऐसे ही दंगल में चौतरफा फंसे राजस्थान के बाद अब शाह ने पूरा फोकस मध्य प्रदेश पर कर दिया है। अपनी मध्य प्रदेश की ताजा यात्रा में शाह ने संकेत दिए कि वह प्रदेश में सत्ता वापसी के लिए गंभीर हैं। होशंगाबाद में भी उन्होंने एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश में 200 पार सीटों के नारे को बुलंद किया। जहां मध्य प्रदेश भी दबाव में है, वहीं शाह कार्यकर्ताओं से प्रचंड भव्य वापसी सुनिश्चित करने के आधार तय करने में जुटे हुए हैं। साथ ही शाह यहां साफ संकेत दे रहे हैं कि 2019 के चुनावों और आने वाले पंचायत चुनावों में सरकार बनाएंगे। शाह भले ही मध्य प्रदेश के कार्यकर्ताओं में जोश भरने के भरपूर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह जानते हैं कि उनका लक्ष्य विधानसभा नहीं, 2019 की लोकसभा है। ऐसे में हिंदी भाषी प्रदेशों में मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य का साथ होना उनके लिए बहुत जरूरी है।

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