जयपुर। प्रदेश की राजनीति गर्मा रही है। एक ओर कांग्रेस और भाजपा अपनी लड़ाईयों में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर इन दोनों पार्टियों को छोड़ अब तीसरे विकल्प को चुनने की बातें कुलांचे मारने लगी हैं। एक तरफ हनुमान बेनीवाल हैं, जो तीसरा मोर्चा खड़ा करने का पूरा दम भर रहे हैं। दूसरी तरफ घनश्याम तिवाड़ी दबाव की राजनीति में आगे बढ़ रहे हैं और विकल्प तैयार कर रहे हैं। लेकिन एक और फ्रंट तैयार हो रहा है। इस फ्रंट को फिलहाल राजस्थान की राजनीति में अवॉइड किया जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में यह भारी पड़ सकता है।

यह प्रयास है आम आदमी पार्टी का। दिल्ली में अपने कामकाज से प्रभावित करने में कामयाब हो रही पार्टी दिल्ली के आस-पास के प्रदेशों में योजनाबद्ध विस्तार कर रही है। इसी विस्तार के तहत किसान नेता रामपाल जाट ने भी आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। हालांकि बड़ी पार्टियां इस बात को हलके में ले रही हैं। लेकिन यही भूल दिल्ली में भी बड़ी पार्टियों से हुई थी, जिसका सीधा लाभ आप को शुरुआती दौर में मिला था। आप को अवॉइड करना इन बड़ी पार्टियों के लिए मुसीबत बन सकता है। क्योंकि किसान नेता रामपाल को साथ लाने के साथ ही किसानों की राजनीति में आप का दखल बढ़ेगा। दिल्ली के मॉडल में पढ़े-लिखे लोगों की पार्टी बनी आप ने आम आदमी को लुभाने का काम जरूर किया है। लेकिन किसान कार्ड खेल कर वह राजस्थान में खलबली मचा सकते हैं। क्योंकि इसी कार्ड को हनुमान बेनीवाल खेल रहे हैं। किसान और बेरोजगार युवा हनुमान बेनीवाल के साथ खड़े हो रहे हैं। इसी तर्ज पर अब चुनावी रंग चढऩे के साथ-साथ बीजेपी और कांग्रेस को भी किसानों की याद आने लगी है।

बहरहाल रामपाल का आम आदमी पार्टी में शामिल होना, राजस्थान की राजनीति में आप द्वारा सफलतापूर्वक सेंध लगाने जैसा है। अब देखना यह होगा कि यह सेंध अपना असर कितने समय में छोड़ पाती है। लेकिन निश्चित ही रामपाल का आज में जाना बड़ी पार्टियों के वोट काटने का काम करेगा। इधर रामपाल ने योजनाबद्ध तरीके से राजस्थान के किसानों को एकजुट करने का ऐलान कर दिया है। किसान विंग बनाई जा रही है ओर घोषणा पत्र में किसानो को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है।

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